121 साल बाद गढ़वाली सरोला ब्राह्मण समाज का भव्य मिलन समारोह, देहरादून में जुटे सैकड़ों लोग

Date:

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संजोने के उद्देश्य से गढ़वाली सरोला ब्राह्मण समाज का भव्य मिलन समारोह देहरादून में आयोजित किया गया। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम करीब 121 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुआ, जिसमें गढ़वाल के विभिन्न जिलों से आए लगभग 400 सरोला ब्राह्मणों ने भाग लिया।

यह भव्य सम्मेलन देहरादून के मिलन वेडिंग पॉइंट में आयोजित किया गया। इससे पहले इस तरह का बड़ा सरोला ब्राह्मण मिलन समारोह साल 1904 में रुद्रप्रयाग में आयोजित हुआ था। इतने लंबे समय बाद समाज के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जिससे पूरे आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया।

1400 साल पुरानी परंपरा को बचाने पर हुआ मंथन

सम्मेलन के दौरान सरोला ब्राह्मण समाज के लोगों ने अपनी लगभग 1400 साल पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित रखने पर विस्तृत चर्चा की। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बदलते समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ती जा रही है, इसलिए इसे बचाने के लिए संगठित प्रयासों की जरूरत है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि यदि समाज के अधिकारों और पहचान को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो इसके लिए भी समाज तैयार रहेगा।

पंवार राजवंश के समय से चली आ रही है परंपरा

गढ़वाल क्षेत्र में सरोला ब्राह्मणों की भूमिका धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से इन ब्राह्मणों को मंदिरों, धार्मिक उत्सवों, विवाह समारोहों, पितृ कर्म और चूड़ा कर्म जैसे आयोजनों में शुद्ध भोजन पकाने और परोसने की जिम्मेदारी दी जाती रही है।

बताया जाता है कि पंवार राजवंश के राजाओं ने सरोला ब्राह्मणों को विशेष रूप से ‘सरोला रसोइया’ के रूप में नियुक्त किया था। उस समय इनकी पहचान शुद्ध और पारंपरिक भोजन व्यवस्था तैयार करने वाले विशेषज्ञों के रूप में होती थी।

आधुनिक कैटरिंग के दौर में कम हो रही परंपरा

समय के साथ स्टैंड-अप कैटरिंग और आधुनिक खानपान व्यवस्थाओं के बढ़ते चलन के कारण यह पारंपरिक व्यवस्था धीरे-धीरे कम होती जा रही है। हालांकि, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी कई जगहों पर यह परंपरा कायम है।

सरोला ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक इस परंपरा को पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि रहे मौजूद

इस भव्य समारोह में कानपुर (उत्तर प्रदेश) के विधायक सुरेंद्र मैठाणी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं टिहरी राज परिवार से जुड़े भवानी प्रताप शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना की।

संगठन के प्रयासों से संभव हुआ आयोजन

गढ़वाली सरोला ब्राह्मण संगठन के अध्यक्ष विजय थपलियाल, सचिव सुरेंद्र डिमरी, कोषाध्यक्ष नरेंद्र बिजल्वाण, साथ ही जगदंबा प्रसाद और सत्य प्रसाद खंडूरी के विशेष प्रयासों से यह भव्य सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग तेज, यूकेडी कार्यकर्ताओं का नरेंद्रनगर में प्रदर्शन

नरेंद्रनगर: गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाए जाने...