उत्तराखंड के नरेंद्रनगर विकास खंड के अंतर्गत स्थित नसोगी गांव में मां बाल कुंवारी भगवती मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम भव्य और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरा इलाका भक्ति में डूबा नजर आया।
पुराने मंदिर का हुआ भव्य पुनर्निर्माण
करीब 35-40 परिवारों वाले इस छोटे से गांव में वर्षों पुराना जीर्ण-शीर्ण मंदिर था। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और आस्था के बल पर अब यहां 37 लाख रुपये से अधिक की लागत से एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के एक बुजुर्ग को स्वप्न में मां बाल कुंवारी भगवती के दर्शन हुए, जिसके बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया गया। इसके बाद पूरे गांव ने एकजुट होकर इस कार्य को पूरा किया।
तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान
मंदिर के गर्भगृह में मां की मूर्ति स्थापना के लिए तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया।
इस दौरान यज्ञाचार्य रमेश उनियाल, आचार्य मुकुंदी राम कपरूवान, आचार्य हेतराम कपरूवान, पंडित प्रमोद कुलियाल और पंडित दीक्षांत डंगवाल ने विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई।
यज्ञाचार्य रमेश उनियाल ने बताया कि मंत्रों और अनुष्ठानों के माध्यम से मूर्ति में दैवीय शक्ति का वास कराया जाता है, जिससे श्रद्धालु सीधे आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ते हैं।
भावुक माहौल, गूंजे जयकारे
पूजा-अर्चना के दौरान मां की मूर्ति को पंचामृत, घृत, शहद और पवित्र जल से स्नान कराया गया। इसके बाद सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित कर गर्भगृह में स्थापित किया गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं की भावनाएं चरम पर थीं। जयकारों और मंदिर की घंटियों की गूंज से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा। कई श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
भंडारे में उमड़ी भीड़
कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
आस्था और एकता का उदाहरण
नसोगी गांव का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह ग्रामीण एकता और सामूहिक प्रयास का भी प्रेरणादायक उदाहरण है।


