उत्तराखंड में होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 19 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है। लेकिन यात्रा के आगाज़ से पहले ही इससे जुड़े कई फैसलों को लेकर प्रदेश में विवाद और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में बद्री-केदार मंदिर समिति द्वारा चारधाम यात्रा के दौरान गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक और उनसे आस्था से जुड़ा एफिडेविट लेने की बात सामने आई थी। यह मुद्दा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
अब श्री पंच गंगोत्री मंदिर समिति ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर नया नियम प्रस्तावित किया है। इसमें पंचगव्य (गंगाजल और गौमूत्र सहित) के सेवन को अनिवार्य करने की बात कही गई है।
भाजपा ने किया समर्थन
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने इस फैसले का समर्थन किया है।
उनके अनुसार, पंचगव्य का सेवन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपराओं के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।
कांग्रेस का विरोध
वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने इस मुद्दे पर भाजपा और मंदिर समितियों पर तीखा हमला बोला है।
उनका कहना है कि:
- गैर-हिंदुओं के प्रवेश का मुद्दा बार-बार उठाकर ध्यान भटकाया जा रहा है
- बद्री-केदार मंदिर समिति अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने की कोशिश कर रही है
- प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक विवाद पैदा किए जा रहे हैं
सियासी माहौल गर्म
चारधाम यात्रा से जुड़े इन फैसलों ने उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर धार्मिक परंपराओं की बात हो रही है, तो दूसरी ओर इसे राजनीतिक एजेंडा बताया जा रहा है।


