संवाददाता: सागर रस्तोगी
आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी क्रम में ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप कार्यालय परिसर में एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और रिस्पांस टाइम को परखना था। ड्रिल के दौरान एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें ट्रांजिट कैंप में आग लगने और उसके बाद भगदड़ जैसी स्थिति को दर्शाया गया।
आपदा स्थिति का वास्तविक अभ्यास
जैसे ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से सूचना मिली, प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम के तहत प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशन से जुड़े सभी सेक्शन को तुरंत एक्टिव किया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान यह दर्शाया गया कि परिसर में करीब 70 से 80 श्रद्धालु, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं, फंसे हुए हैं। राहत एवं बचाव टीमों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
घायलों को तत्काल पहुंचाया अस्पताल
अभ्यास के अंतिम चरण में दो गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को एंबुलेंस के जरिए तुरंत सरकारी अस्पताल भेजा गया। इस पूरी प्रक्रिया में राहत टीमों की तत्परता और समन्वय को बारीकी से परखा गया।
प्रशासन ने जताया संतोष
एसडीएम ऋषिकेश योगेश मेहरा ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान सभी विभागों का समन्वय और रिस्पांस टाइम संतोषजनक रहा। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभ्यास आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।
मॉक ड्रिल को दो चरणों में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें मौजूद रहीं।


