नरेंद्रनगर :Forest Rights Act 2006 के तहत अधिकार मिलने के बावजूद वन क्षेत्रों में रहने वाले वन गुर्जर समुदाय को आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। पीढ़ी दर पीढ़ी जंगलों के बीच गाय, भैंस और बकरी पालन कर अपने परिवारों का भरण-पोषण करने वाले इस समुदाय ने अब सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
वन गुर्जरों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित
Narendranagar क्षेत्र में वन अधिकार ग्राम पंचायत सिंबल स्त्रोत कुशरेला के बैनर तले वन गुर्जर समुदाय की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समुदाय के लोगों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा की।
वन अधिकार अधिनियम लागू, लेकिन सुविधाएं नहीं
बैठक को संबोधित करते हुए Mohammad Rafi Van Gujjar ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू होने के बावजूद वन गुर्जर समुदाय को आज तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
उन्होंने कहा कि भारत आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और चंद्रमा तक पहुंच चुका है, लेकिन जंगलों में रहने वाले वन गुर्जर आज भी कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं।
जंगली जानवरों के डर से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
समुदाय के लोगों ने बताया कि जंगलों में खूंखार जंगली जानवरों का लगातार खतरा बना रहता है। इसी डर के कारण लगभग 37 बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।
इसके अलावा गुर्जर डेरों में पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं का भी गंभीर अभाव है।
समुदाय की प्रमुख मांगें
वन गुर्जर समाज ने सरकार से कुछ अहम मांगें रखी हैं:
- 20 गुर्जर डेरों के मध्य स्थान पर प्राथमिक और जूनियर स्कूल की स्थापना
- क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र खोलने की व्यवस्था
- सभी डेरों में बिजली और पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना
समुदाय का कहना है कि यदि ये सुविधाएं मिलती हैं तो वे भी आधुनिक और विकसित भारत का हिस्सा बनने का गौरव महसूस कर सकेंगे।
महिलाओं ने भी रखी अपनी बात
बैठक में महिला वन गुर्जरों ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं। उन्होंने बताया कि जंगलों में रहकर परिवार और पशुओं की सुरक्षा करना बेहद कठिन है और बुनियादी सुविधाओं की कमी उनके जीवन को और कठिन बना देती है।


