उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। राज्य के भाषा मंत्री खजान दास ने पदभार संभालने के बाद साफ किया कि कुमाऊंनी, गढ़वाली, जौनसारी और नेपाली भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मजबूत पैरवी की जाएगी।
भाषा संस्थान की पहली समीक्षा बैठक के बाद मंत्री ने कहा कि देवभूमि के साहित्यकारों और रचनाकारों को उचित मंच उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ‘विकसित उत्तराखंड’ विजन के अनुरूप प्रदेश की लोक बोलियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
मंत्री खजान दास के इस फैसले से क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इससे भाषा और संस्कृति से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन भाषाओं को आठवीं अनुसूची में स्थान मिलता है, तो इनके विकास, संरक्षण और शैक्षणिक उपयोग को नई मजबूती मिलेगी।


