कॉर्बेट का ‘लाल कान वाला गजराज,दुर्लभ टस्कर बना जंगल का नया सितारा, वन्यजीव प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र…

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आसिफ इक़बाल / रामनगर

विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।
इन दिनों कॉर्बेट में दिखाई दे रहा एक विशालकाय लाल कान वाला दुर्लभ टस्कर हाथी वन्यजीव प्रेमियों, पर्यटकों और फोटोग्राफरों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है,
अपने विशाल शरीर, लंबे चमकदार दांतों और लाल रंग के कानों के कारण यह हाथी दूर से ही अलग पहचान बना लेता है।
हाल ही में यह दुर्लभ टस्कर कॉर्बेट के विभिन्न क्षेत्रों में देखा गया,
अब जून मे यह हाथी कॉर्बेट के सबसे लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्र ढिकाला जोन के ग्रासलैंड इलाके में विचरण करता दिखाई दिया था,इसके बाद यह लगभग 25 किलोमीटर की दूरी तय कर जून मे ही झिरना रेंज पहुंच गया। इस हाथी की लगातार गतिविधियों पर वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों की नजर बनी हुई है.
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वर्तमान समय में 1200 से अधिक एशियाई हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है, लेकिन लाल कान वाले हाथी बेहद कम संख्या में दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यह दुर्लभ टस्कर चर्चा का विषय बना हुआ है।
कॉर्बेट के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ने बताया हैं कि यह हाथी कॉर्बेट के सबसे अलग पहचान वाले टस्करों में से एक है। अनुमानित रूप से 40 से 45 वर्ष आयु का यह परिपक्व नर हाथी अपने शांत स्वभाव और विशाल कद-काठी के लिए जाना जाता है, सामान्यतः यह आक्रामक व्यवहार नहीं करता, जिससे वन्यजीव फोटोग्राफरों को इसके प्राकृतिक व्यवहार और शानदार तस्वीरें कैद करने का अवसर मिलता है.
लाल कानों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की जिज्ञासाएं रहती हैं। हालांकि यह किसी बीमारी या संक्रमण का संकेत नहीं है,दरअसल कानों में पिगमेंट की कमी और रक्त वाहिकाओं की विशेष संरचना के कारण कानों का रंग लाल दिखाई देता है,यही अनोखी विशेषता इस हाथी को अन्य हाथियों से अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करती है.
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार लगभग एक दशक पहले भी कॉर्बेट में ऐसा ही एक लाल कान वाला विशाल टस्कर हाथी देखा जाता था, जिसकी वर्ष 2017 में दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी, उसके बाद लंबे समय से ऐसा कोई हाथी दिखाई नहीं दिया था। ऐसे में वर्तमान में दिख रहा यह लाल कान वाला टस्कर एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि स्वस्थ, शक्तिशाली और परिपक्व नर हाथियों की मौजूदगी किसी भी जंगल के मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत होती है,लाल कान वाला यह दुर्लभ गजराज केवल कॉर्बेट की सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक नहीं है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता की जीवंत मिसाल भी है। जंगल की हरियाली के बीच विचरण करता यह विशालकाय टस्कर आज कॉर्बेट की नई पहचान बनता नजर आ रहा है।

Byte.-दीप रजवार,
वाइल्ड लाइफ फ़ोटो ग्राफर,
कॉर्बेट रामनगर।

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