क्या कहा बीकेटीसी अध्यक्ष ने?
बीते दिन आयोजित प्रेस वार्ता में हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिरों, विशेष रूप से केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।
हालांकि, इसी बयान के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति आस्था रखता है और शपथपत्र देता है, तो उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है।
इस तरह के दोहरे रुख ने लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
कांग्रेस का तीखा हमला
बीकेटीसी के इस बयान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने समिति के इरादों पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीकेटीसी पहले से ही भ्रष्टाचार के मामलों में घिरा हुआ है और अब इस तरह के बयान देकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
चुनावी साल में बढ़ा विवाद
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित हो सकता है, क्योंकि यह चुनावी वर्ष है। उनके अनुसार, इस तरह के मुद्दों को उठाकर माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
क्या है असली सवाल?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बीकेटीसी का स्पष्ट स्टैंड क्या है—
क्या वास्तव में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है, या फिर आस्था के आधार पर उन्हें अनुमति दी जाएगी?
जब तक इस पर स्पष्ट नीति सामने नहीं आती, तब तक यह विवाद और गहराने की संभावना है।


