पवित्र चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही सरोवर नगरी नैनीताल समेत पूरे देश में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। सुबह से ही श्रद्धालु व्रत रखकर और घरों में पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
मान्यता के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाता है। चारों ओर “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा है।
प्रमुख मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़
नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में स्थित प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा देखने को मिला। खासतौर पर
- घोड़ाखाल मंदिर
- कैंची धाम
- हनुमान गढ़ी मंदिर
- गुफा महादेव मंदिर
- स्नो व्यू मंदिर
- सत्य नारायण मंदिर
- मां नयना देवी मंदिर
इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तजन माता रानी के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन
नवरात्रि के पहले दिन मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति में डूबा नजर आया।
यहां विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और सुंदरकांड जैसे धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जा रहा है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु मां के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं।
मां नयना देवी मंदिर की पौराणिक मान्यता
विश्व प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर से जुड़ी मान्यता बेहद खास है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी सती ने यज्ञ में आत्माहुति दी, तो भगवान शिव उनके शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया।
मान्यता है कि सती की बाईं आंख नैनीताल में गिरी, जिसके बाद यहां मां नयना देवी की स्थापना हुई। यही कारण है कि यह स्थान प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है।
नवरात्रि में नैनीताल का अद्भुत माहौल
नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरा नैनीताल भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा हुआ है। श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। साथ ही, यहां हर वर्ष आयोजित होने वाला नंदा सुनंदा देवी महोत्सव भी इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।


