रिपोर्टर: धर्मेंद्र सिंह
मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में भूमिधरों और उत्तर रेलवे के बीच चल रहा सीमांकन विवाद एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से भूमि की सीमा तय करने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद जारी है।
प्रशासन ने संभाली कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी राहुल आनंद के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान दोनों पक्षों—रेलवे अधिकारियों और स्थानीय भूमिधरों—के साथ विस्तृत वार्ता की गई।
दोनों पक्षों ने रखा अपना पक्ष
बैठक के दौरान:
- उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए
- भूमिधरों ने भी अपने स्वामित्व से जुड़े प्रमाण पेश किए
उप जिलाधिकारी ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों का निरीक्षण किया और उनके मिलान के निर्देश दिए।
जल्द होगी भूमि की पैमाइश
प्रशासन ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया है कि:
- विवादित भूमि की सटीक नाप की जाए
- जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाए
जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोनों पक्षों को किसी भी प्रकार के विवाद या निर्माण से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
1940 के समझौते का हवाला
भूमिधर प्रतिनिधि अजय गोयल ने दावा किया कि वर्ष 1940 में भूमिधरों और उत्तर रेलवे के बीच जमीन को लेकर समझौता हो चुका था। इसके बावजूद रेलवे द्वारा इस भूमि पर अधिकार जताया जा रहा है और स्थानीय लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने अवैध बताया।
समाधान की दिशा में बढ़ा कदम
प्रशासन का कहना है कि मानचित्र और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। नाप-जोख की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे लंबे समय से चल रहे इस विवाद का समाधान संभव हो सके।


