मां गंगा के तट पर बसे परमार्थ निकेतन में होली का पर्व इस बार दिव्य और ऊर्जावान वातावरण में मनाया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर प्रेम और सौहार्द के रंगों से यह त्योहार मनाया।
वैश्विक भाईचारा
जाती, भाषा और देशों की सीमाओं से परे, योग साधक और जिज्ञासु एक वैश्विक परिवार की तरह एकत्र हुए। आश्रम परिसर रंगों और भाईचारे की मिसाल बन गया।
होली का सच्चा संदेश
अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि होली का असली संदेश है दूसरों के जीवन में खुशियों के रंग भरना। मानवता ही वह रंग है जो भेदभाव मिटाकर सभी को जोड़ता है। सेवा और सद्भाव अपनाकर ही जीवन सच में रंगीन और सार्थक बनता है।
रिपोट – सागार रस्तोगी


