रिपोर्टर: सचिन कुमार
देहरादून के लोक भवन सभागार में शनिवार को गुजरात एवं महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात समाज समिति, हरिद्वार गुज्जू परिवार, महाराष्ट्र समाज समिति सहित विभिन्न संगठनों के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान दोनों राज्यों के कलाकारों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक कला की मनमोहक झलक देखने को मिली। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को गुजरात और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) भी मौजूद रहे। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्ध परंपराओं का जीवंत उदाहरण है।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि कलाकारों की प्रस्तुतियों में भक्ति, समर्पण और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की गहराई को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता, संस्कृति, लोकगीत और लोकसंगीत हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने परिवार की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब एक ही मंच पर बच्चे, युवा और बुजुर्ग मिलकर अपनी संस्कृति का उत्सव मनाते हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
राज्यपाल ने ‘अनेकता में एकता’ की परंपरा को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि देश की विभिन्न भाषाएं, वेशभूषाएं, खान-पान और सांस्कृतिक परंपराएं हमें एक सूत्र में बांधती हैं। उन्होंने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को दोहराते हुए राष्ट्रीय एकता, समन्वय और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना को और मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करते हैं।


