रिपोर्टर: धर्मेंद्र सिंह
मसूरी के लंढौर बाजार क्षेत्र में भू-धंसाव के खतरे के बीच प्रशासन द्वारा एक दुकान स्वामी को नोटिस जारी किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया है।
भू-धंसाव के बाद छह भवन घोषित हुए जर्जर
नगर पालिका परिषद मसूरी, आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासन द्वारा किए गए सर्वेक्षण में लंढौर बाजार के लगभग छह भवनों को गिरासू (जर्जर) श्रेणी में चिन्हित किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए एक दुकान को खाली करने का नोटिस जारी कर दिया।
“एक ही दुकान को क्यों निशाना?” – स्थानीय लोग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब कई भवन खतरे की श्रेणी में हैं, तो केवल एक दुकान को नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है। लोगों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई किसी षड्यंत्र के तहत करवाई गई है।
विधवा महिला पर संकट, 25 साल से चला रही दुकान
जिस दुकान को नोटिस दिया गया है, वहां सरोजनी राणा नामक महिला पिछले करीब 25 वर्षों से स्वरोजगार कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। उन्होंने बताया कि बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें तीन दिन के भीतर दुकान और मकान खाली करने का नोटिस दे दिया गया।
सरोजनी राणा ने कहा,
“मैं एक विधवा महिला हूं, मेरे दो बेटियां हैं। इसी दुकान से घर चलता है और बच्चों की पढ़ाई होती है। अब अचानक नोटिस मिलने से डर का माहौल है।”
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति का करीब 12 साल पहले निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई।
पुनर्वास और रोजगार पर कोई योजना नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने न तो प्रभावित लोगों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था की है और न ही उनके रोजगार को लेकर कोई ठोस कदम उठाया है।
पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
पूर्व विधायक जोत सिंह गुमसुला ने नगर पालिका परिषद मसूरी और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मसूरी में करीब 58 भवन गिरासू हैं, लेकिन कार्रवाई केवल एक महिला के खिलाफ की जा रही है।
उन्होंने कहा,
“कानूनी दांव-पेंच का इस्तेमाल कर एक गरीब महिला को परेशान किया जा रहा है। सभी जर्जर भवनों के मालिकों को समान रूप से नोटिस दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में महिला के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
80 साल पुराना व्यवसाय, परिवार की आजीविका पर संकट
स्थानीय निवासी कुशाल सिंह राणा ने बताया कि उनके परिवार द्वारा पिछले करीब 80 वर्षों से इस स्थान पर दुकान चलाई जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासन को नोटिस देने से पहले पुनर्वास और रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
बढ़ता विवाद, समाधान की मांग
इस मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल है और स्थानीय लोग प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और प्रभावित परिवार के लिए उचित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।


