NIT Pauri Garhwal Construction: 1000 करोड़ की परियोजना पर सवाल…..

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रिपोर्ट: भगवान सिंह | पौड़ी गढ़वाल

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के सुमाड़ी क्षेत्र में बन रहे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) परिसर के निर्माण कार्य को लेकर अब स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेके को कई स्तरों पर आगे बढ़ाने यानी स्थानीय भाषा में कहे जाने वाले “पेटी दर पेटी” सिस्टम के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

1000 करोड़ की परियोजना में कैसे रह गए 550 करोड़?

मिली जानकारी के अनुसार, इस परियोजना का मूल ठेका करीब 1000 करोड़ रुपये का था। आरोप है कि सबसे पहले यह ठेका NBCC को मिला। लेकिन NBCC ने खुद निर्माण कार्य शुरू करने के बजाय करीब 250 करोड़ रुपये का मुनाफा रखते हुए यह ठेका लगभग 750 करोड़ रुपये में SAM India कंपनी को ट्रांसफर कर दिया।

बताया जा रहा है कि इसके बाद SAM India ने भी बिना निर्माण कार्य किए करीब 200 करोड़ रुपये का लाभ लेते हुए यह ठेका 550 करोड़ रुपये में हिमालयन कंपनी को दे दिया। वर्तमान में मौके पर यही कंपनी निर्माण कार्य कर रही है।

भाजपा युवा नेता ने उठाए सवाल

इस मामले को लेकर भाजपा के युवा नेता सुधीर जोशी ने निर्माण स्थल का दौरा किया और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि अगर 1000 करोड़ की परियोजना को आखिर में 550 करोड़ रुपये में बनाया जाएगा, तो निर्माण की गुणवत्ता पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे ठेका प्रक्रिया में करीब 450 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह रकम कहां गई और किसके हिस्से में आई।

कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि कहीं इस पूरे मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों या विभागीय अधिकारियों की भूमिका तो नहीं है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पहाड़ों में “पेटी सिस्टम” नया नहीं

दरअसल, पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों में ठेकों को कई स्तरों पर सब-कॉन्ट्रैक्ट देने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। स्थानीय भाषा में इसे “पेटी पर पेटी” सिस्टम कहा जाता है।

इस प्रक्रिया में मूल ठेकेदार काम को आगे दूसरे ठेकेदार को दे देता है और यह सिलसिला चलता रहता है। नतीजतन अंतिम ठेकेदार तक पहुंचते-पहुंचते बजट कम हो जाता है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से पहले भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी कई सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

अब उठ रही है जांच की मांग

सुमाड़ी में बन रहे NIT परिसर को क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और संबंधित विभाग इस मामले की जांच कराएंगे, या फिर करोड़ों रुपये की यह परियोजना भी “पेटी सिस्टम” की भेंट चढ़ जाएगी

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