रिपोर्ट: भगवान सिंह
पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय गैण्डखाल में 4 जुलाई को हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया, जिसने चिकित्सालय पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
पिछले कई महीनों से उठ रहे थे सवाल
युवक मंगल दल नांद मल्ला के अध्यक्ष अनूप सिंह चौहान ने बताया कि पिछले 6–7 महीनों से चिकित्सालय के कर्मचारियों से नियमित रूप से ड्यूटी निभाने का अनुरोध किया जा रहा था, लेकिन उनकी कार्यशैली और व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि 4 जुलाई को निरीक्षण के दौरान महिला फार्मासिस्ट से उपस्थिति पंजिका का विवरण मांगने पर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। इसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
जांच टीम ने लिया मौके का जायजा
विवाद के बाद गठित चार सदस्यीय विभागीय जांच टीम ने चिकित्सालय पहुंचकर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने चिकित्सालय की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग करते हुए डॉक्टर और फार्मासिस्ट का 10 दिनों के भीतर स्थानांतरण किए जाने की मांग रखी।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी।
तीन दिन में मांगी गई जांच रिपोर्ट
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र पांडे ने बताया कि 4 जुलाई को हुए विवाद की जानकारी विभाग को मिल चुकी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार महिला फार्मेसी अधिकारी के साथ हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
उन्होंने बताया कि मल्ला और झेड ग्राम सभा के ग्राम प्रधानों तथा स्थानीय विधायक की ओर से भी शिकायत पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें चिकित्सालय के कर्मचारियों द्वारा नियमित ड्यूटी न करने के आरोप लगाए गए हैं।
डॉ. पांडे ने कहा कि वायरल वीडियो और प्राप्त शिकायतों के आधार पर चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है, जिसे तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
प्रमुख बिंदु
- 4 जुलाई के विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
- विभाग ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित की।
- स्थानीय लोगों ने 10 दिनों में सुधार और स्थानांतरण की मांग की।
- कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
- तीन दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश।



