रुड़की: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। हरिद्वार जिले की मंगलौर विधानसभा में पार्टी के भीतर बढ़ती नाराज़गी अब सार्वजनिक मंच तक पहुंच गई है। कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष मरगूब कुरैशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी ही पार्टी के नेताओं पर उपेक्षा का आरोप लगाया।
मरगूब कुरैशी ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संगठन और स्थानीय नेतृत्व से अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। उनका आरोप है कि पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि झबरेड़ा विधायक वीरेन्द्र जाती के एक पत्र के आधार पर उनके पद पर किसी अन्य नेता की सिफारिश की गई। इसे उन्होंने संगठन के भीतर पक्षपात और गुटबाजी का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान मरगूब कुरैशी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय कार्यक्रमों के बैनरों से हरीश रावत की तस्वीर तक गायब रखी गई, जो पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व समय रहते इन मतभेदों को सुलझाने में सफल नहीं होता, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, इन आरोपों पर विधायक काज़ी निज़ामुद्दीन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



