रिपोर्ट: ललित जोशी
सरोवर नगरी नैनीताल में दिन के समय लगातार जल रही स्ट्रीट लाइटें अब चर्चा का विषय बन गई हैं। शहर की गलियों, कूचों और मोहल्लों में लोग इसे बिजली की बर्बादी और प्रशासनिक लापरवाही से जोड़कर देख रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में दोपहर तक स्ट्रीट लाइटें जलती रहती हैं, जिससे न सिर्फ बिजली की अनावश्यक खपत हो रही है बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड में स्ट्रीट लाइट के बिजली बिल को लेकर चर्चाएं तेज थीं। इस बीच प्रदेश के शहरी विकास मंत्री Ram Singh Kaida ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक उपयोग के लिए लगाई गई स्ट्रीट लाइटों का कोई अतिरिक्त शुल्क आम जनता से नहीं लिया जाएगा। मंत्री के इस फैसले का प्रदेशभर में स्वागत हुआ था और लोगों ने राहत की सांस ली थी।
हालांकि, नैनीताल में दिन के समय जलती स्ट्रीट लाइटों को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि सरकार ने बिजली शुल्क माफ नहीं किया होता तो इसका सीधा आर्थिक बोझ आम जनता पर पड़ सकता था। लोगों का कहना है कि बार-बार इस तरह स्ट्रीट लाइटों का दिन में जलना बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि स्ट्रीट लाइटों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि बिजली की अनावश्यक बर्बादी रोकी जा सके और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।


