संवाददाता: सागर रस्तोगी
ऋषिकेश शहर की गलियों में बिजली के खंभों पर अवैध रूप से लटकाए गए तार अब लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। वार्ड नंबर 10 स्थित सदानंद मार्ग पर बिजली के एक खंभे में लगी आग की घटना ने बिजली विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
बिजली के पोल में लगी आग, मची अफरा-तफरी
मंगलवार को वार्ड नंबर 10 में एक बिजली के खंभे से अचानक चिंगारी उठी, जिसने कुछ ही सेकंड में आग का रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिजली के पोल पर फाइबर ऑप्टिक और विभिन्न निजी कंपनियों के अवैध केबलों का भारी जाल लटका हुआ था, जिसके चलते आग तेजी से फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
नगर निगम और विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना के बाद नगर निगम और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है। क्षेत्रीय पार्षद आशू डंग ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बोर्ड बैठकों में कई बार इस समस्या को उठाया गया था।
उन्होंने बताया कि शहर में केबल बिछाने के लिए व्यवस्थित डक्टिंग सिस्टम लागू करने का सुझाव भी दिया गया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पार्षद का आरोप है कि निजी इंटरनेट और केबल कंपनियों की मनमानी पर विभाग अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल रहा है।
“यह सिर्फ एक पोल की आग नहीं”
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना केवल एक पोल में लगी आग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शहर में फैली अव्यवस्था और लापरवाही की चेतावनी है। लोगों ने प्रशासन से जल्द अवैध तारों को हटाने और सुरक्षित व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई: बिजली विभाग
मामले में बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता शक्ति सिंह प्रसाद ने कहा कि घटना की जांच कराई जाएगी और अवैध रूप से तार लटकाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


