रिपोर्ट: सुभाष चंद
उत्तराखंड के खटीमा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने राज्य सरकार की गेहूं खरीद नीति पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडियों के बजाय गांवों में ही क्रय केंद्र स्थापित करने की मांग की है।
विधायक कापड़ी ने प्रेस वार्ता में कहा कि 64 गांवों के बड़े क्षेत्र के लिए केवल 35 क्रय केंद्र पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने इसे “ऊंट के मुंह में जीरा” बताते हुए सरकार से तुरंत नए केंद्र खोलने की मांग की। साथ ही, अशोक फार्म, कुआं खेड़ा, भुडिया थारू और मझोला जैसे गांवों में पहले संचालित रहे केंद्रों को दोबारा शुरू करने की अपील की।
उन्होंने गेहूं और धान की खरीद के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। कापड़ी के अनुसार, जहां धान की खरीद 65 लाख क्विंटल तक की जाती है, वहीं गेहूं का लक्ष्य मात्र 5 लाख क्विंटल तय किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल है, लेकिन बाजार में गेहूं की कीमत ₹2000 तक गिर चुकी है।
इस स्थिति में सीमित क्रय केंद्र और कम कीमतों के कारण छोटे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कापड़ी ने दावा किया कि एक किसान को 20 क्विंटल गेहूं पर करीब ₹11,000 तक का सीधा नुकसान हो सकता है।
विधायक ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का भी जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते गेहूं के बाजार मूल्य में गिरावट आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो सीमांत किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि अधिक संख्या में क्रय केंद्र खोले जाएं और खरीद लक्ष्य को बढ़ाया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।


