Wednesday, October 21, 2026
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आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संगम: पैनक्रियाज रोगों के उपचार में नई उम्मीद…

आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। पारा, गंधक, सोना, चांदी, तांबा और जस्ता जैसी धातुओं को जड़ी-बूटियों के साथ विशेष प्रक्रियाओं द्वारा भस्म में परिवर्तित करने की प्राचीन विधा, जिसे रसशास्त्र में वर्णित किया गया है, आज वैज्ञानिक मानकों के साथ नए रूप में विकसित की जा रही है।

क्या है यह विशेष आयुर्वेदिक औषधि?

इस परंपरा पर आधारित “अमर” नामक एक विशेष औषधि, जिसमें पारा, तांबा और गंधक को विभिन्न जड़ी-बूटियों के साथ लगभग तीन वर्षों की दीर्घकालीन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, पैनक्रियाज से जुड़े जटिल रोगों में प्रभावी पाई गई है। 1970 के दशक में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे।

वर्ष 1997 के बाद इस औषधि के माध्यम से मरीजों का व्यवस्थित और प्रलेखित उपचार शुरू हुआ। अब तक देशभर से आए 2675 से अधिक मरीज इस उपचार से लाभान्वित हो चुके हैं। इस औषधि को भारत सरकार द्वारा पैनक्रियाज रोगों के उपचार हेतु पेटेंट भी प्रदान किया गया है, जो इसे खास बनाता है।

पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का योगदान

इस औषधि का निर्माण और वैज्ञानिक विकास वैद्य बालेंदु प्रकाश द्वारा किया जा रहा है। उन्हें यह विद्या उनके पिता स्वर्गीय वैद्य चंद्र प्रकाश से विरासत में मिली है।

परंपरागत रूप से यह औषधि मिट्टी के चूल्हों और हांडियों में लकड़ी की अग्नि पर तैयार की जाती रही है। हालांकि अब भी पारंपरिक विधियों का पालन किया जाता है, लेकिन प्रक्रिया की सटीकता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

आधुनिक उपकरणों से हो रही वैज्ञानिक निगरानी

औषधि निर्माण को अधिक वैज्ञानिक और मानकीकृत बनाने के लिए एक्स-रे डिफ्रैक्टोमीटर, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, पार्टिकल साइज़ एनालाइज़र और पीएच मीटर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।

इसी कड़ी में आज रसशाला में एक कंप्यूटरीकृत क्लाउड-आधारित टेम्परेचर लॉगिंग सिस्टम स्थापित किया गया, जिससे भट्ठियों के अंदर तापमान की सटीक निगरानी संभव हो सकेगी। इस तकनीक के विकास में यूपीईएस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

इस आधुनिक उपकरण का उद्घाटन अरुण कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चित्रक मित्तल ने की।

इस अवसर पर केएलए ग्रुप के एमडी अरुण अग्रवाल, यूपीईएस की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अमृतांश और पीएचडी स्कॉलर हितेश भी उपस्थित रहे। देश के 13 राज्यों से आए 25 मरीज और उनके परिजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन नेहा नेगी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुनील शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस दौरान उत्तराखंड प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रदीप फुटेला समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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