रिपोर्टर: धर्मेंद्र सिंह
मसूरी में छावनी परिषद का नाम बदलकर “रामगिर” करने के प्रस्ताव ने विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संघों और स्थानीय निवासियों ने इस फैसले के खिलाफ खुलकर विरोध जताया है। आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव को क्षेत्र की पहचान के खिलाफ बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि छावनी परिषद लंढोर की ऐतिहासिक पहचान को बदलना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में चार दुकान, लाल टिब्बा जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि नाम परिवर्तन से न केवल क्षेत्र की पहचान प्रभावित होगी, बल्कि आम जनता को भी अपने दस्तावेजों में बदलाव करना पड़ेगा। इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा और अनावश्यक परेशानियां पैदा होंगी।
छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष महेश चंद्र ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छावनी परिषद प्रणाली ब्रिटिश काल की देन है और आज भी यहां के लोगों को जमीन के अधिकार पूरी तरह नहीं मिले हैं। उनका कहना है कि यदि कोई बदलाव करना है तो व्यवस्था में सुधार किया जाए, केवल नाम बदलने से समस्याएं हल नहीं होंगी।
मसूरी में इस मुद्दे को लेकर माहौल गरमाता जा रहा है और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में यह मामला प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।


