Friday, November 6, 2026
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उत्तराखंड के 400 मदरसों को जिला स्तर पर लेनी होगी संबद्धता, कैबिनेट का बड़ा फैसला

रिपोर्टर: सचिन कुमार

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर बड़ा प्रशासनिक और शैक्षणिक निर्णय लिया है। कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब राज्य के अधिकांश मदरसों को जिला स्तर पर संबद्धता लेना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था के अनुसार, उत्तराखंड में पंजीकृत कुल 452 मदरसों में से लगभग 400 मदरसों—जहां कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है—को अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति या संबंधित सक्षम अधिकारी से संबद्धता प्राप्त करनी होगी। इन मदरसों में करीब 50,000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं।

वहीं, कक्षा 9 से 12 तक संचालित बाकी मदरसों को 30 जून तक उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता लेना अनिवार्य किया गया है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन में यह भी प्रावधान शामिल है कि जो मदरसे बंद पड़े हैं या नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, उन पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे संस्थानों के संचालन के लिए रिसीवर नियुक्त करने का अधिकार भी सरकार को दिया जाएगा।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट द्वारा पारित ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अध्यादेश’ राज्य के मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि जिला स्तर पर पंजीकरण की सुविधा मिलने से मदरसों के लिए प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही अब मदरसों में उत्तराखंड बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी, जिससे यहां के छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस जैसे बड़े पदों तक पहुंच सकेंगे।

यह निर्णय राज्य में शिक्षा प्रणाली को एकरूप और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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