रिपोर्ट: नवीन चन्दोला
चमोली जिले के देवाल ब्लॉक में स्थित मेलखेत हाइड्रो प्रोजेक्ट पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पर्यावरण नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। पिंडर नदी में भारी मशीनों से बड़े पैमाने पर खनन होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि मेलखेत, नलधूरा और बोरागाड़ क्षेत्र में करीब 9 से अधिक पोकलैंड मशीनों से नदी का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी और जीव-जंतुओं पर खतरा मंडरा रहा है।
आरोप है कि परियोजना कंपनी ने शुरुआत में गांव में बैठक और जनहित योजनाओं का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई खुली बैठक नहीं हुई और बिना जानकारी के काम शुरू कर दिया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक,
- डीपीआर सार्वजनिक नहीं की गई
- खनन क्षेत्र का सीमांकन नहीं हुआ
- ग्राम पंचायत की NOC स्पष्ट नहीं
- भूमि धारकों से सहमति नहीं ली गई
- आपदा क्षेत्र होने के बावजूद सुरक्षा के इंतजाम नहीं
लगभग 60 से अधिक परिवारों को भविष्य में नुकसान की आशंका है, क्योंकि भारी मशीनों से भूमि कटान जारी है।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन और खनन विभाग की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर खनन के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।


