तिलपुरी वन क्षेत्र में गिद्धों की वापसी, पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत

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गदरपुर: उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र से पर्यावरण के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। लंबे समय से विलुप्ति की कगार पर पहुंचे गिद्ध (Vultures) अब एक बार फिर इलाके में दिखाई देने लगे हैं। गदरपुर के तिलपुरी गांव के पास स्थित वन क्षेत्र में इन दिनों कई गिद्धों की मौजूदगी देखी जा रही है, जिससे पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।

रिपोर्ट: अमित तनेजा

तिलपुरी वन क्षेत्र में दिखाई दे रहे गिद्ध

जानकारी के अनुसार गदरपुर क्षेत्र के तिलपुरी गांव के नजदीक स्थित वन क्षेत्र में इन दिनों आसमान में मंडराते गिद्ध लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। कुछ वर्षों पहले तक गिद्धों की संख्या तेजी से घट रही थी और यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए थे।

लेकिन अब एक बार फिर इस इलाके में गिद्धों की मौजूदगी देखी जा रही है, जिसे पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों में खुशी

गांव के स्थानीय लोग भी गिद्धों को देखकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि कई सालों बाद क्षेत्र में इतने गिद्ध दिखाई दिए हैं। इससे लोगों को उम्मीद जगी है कि इलाके का प्राकृतिक वातावरण फिर से संतुलित हो रहा है।

पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं गिद्ध

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी (Nature’s Cleaner) माना जाता है। यह मृत पशुओं को खाकर वातावरण को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गिद्धों की मौजूदगी से कई प्रकार की बीमारियों के फैलने का खतरा भी कम हो जाता है। इसलिए किसी भी क्षेत्र में गिद्धों की वापसी को प्राकृतिक संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों की राय

जीव विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष त्रिपाठी का कहना है कि गिद्धों की संख्या में गिरावट पिछले वर्षों में एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या रही है। ऐसे में किसी क्षेत्र में उनकी वापसी यह संकेत देती है कि वहां का पर्यावरण धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है।

वहीं स्थानीय निवासी संजीव भाटेजा ने भी बताया कि तिलपुरी वन क्षेत्र में इन दिनों कई गिद्ध दिखाई दे रहे हैं, जो इलाके के लिए अच्छी खबर है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

फिलहाल गदरपुर के तिलपुरी वन क्षेत्र में गिद्धों की वापसी ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों को नई उम्मीद दी है। यह न केवल प्रकृति के संतुलन के लिए अच्छा संकेत है, बल्कि यह भी बताता है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है।

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