सचिन कुमार
उत्तराखंड में बच्चों और किशोरों के खिलाफ बढ़ते अपराधों और हिंसा की घटनाओं ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई हालिया गंभीर घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे अत्यंत चिंताजनक बताया है।
क्या है मामला?
आयोग ने हाल ही में तीन प्रमुख घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है:
विकासनगर: 12 वर्षीय बालक के साथ मारपीट कर उसका हाथ तोड़ने की घटना।
हरिद्वार: मासूम बालिका के अपहरण का मामला।
टिहरी: प्रेम संबंध के चलते एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या।
इन मामलों पर डॉ. खन्ना ने संबंधित जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सामाजिक मूल्यों के क्षरण पर जताई चिंता
डॉ. खन्ना ने कहा कि अपराध के साथ-साथ समाज में बढ़ती असहिष्णुता, पूर्वाग्रह और कानून को हाथ में लेने की प्रवृत्ति समाज के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि हमारे गिरते नैतिक मूल्यों को भी दर्शाती हैं।
सुरक्षा के लिए 18 जून को मंथन
बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आयोग ने आगामी 18 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इसमें पुलिस, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, श्रम और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए एक प्रभावी और ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए वे निरंतर निगरानी बनाए रखेंगे।



