भगवानपुर क्षेत्र के रुहालकी दयालपुर में वन विभाग देहरादून की टीम ने एक फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में तैयार तारपीन का तेल और बिरोजा बरामद किया है। कार्रवाई के बाद फैक्ट्री परिसर में हड़कंप मच गया।
वन विभाग की टीम ने रुड़की रेंज के भगवानपुर अनुभाग में स्थित फैक्ट्री में छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यहां चीड़ की लकड़ी से निकलने वाले लीसे से तारपीन का तेल और बिरोजा तैयार किया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में न तो मैनेजर मौजूद मिला और न ही कंपनी का स्वामी मौके पर था। टीम को मौके पर चार कर्मचारी मिले। वन विभाग के अधिकारियों ने फैक्ट्री में मौजूद स्टॉक और उत्पादन से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन कर्मचारी मौके पर संतोषजनक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं करा सके।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने फैक्ट्री में मौजूद तैयार माल को सील कर दिया। उप प्रभागीय वनाधिकारी उदय गॉड के मुताबिक, मौके से करीब 14,900 किलोग्राम तैयार तारपीन का तेल और 17,252 किलोग्राम बिरोजा बरामद किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मौके पर इस तैयार माल का संतोषजनक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं था।
अब वन विभाग यह जांच करेगा कि फैक्ट्री में चीड़ का लीसा किस डिपो से लाया जा रहा था, कितनी मात्रा में कच्चा माल फैक्ट्री तक पहुंचा और उससे कितना उत्पादन किया गया। विभाग यह भी जांच करेगा कि फैक्ट्री में मौजूद स्टॉक निर्धारित रिकॉर्ड के अनुरूप है या नहीं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि निर्धारित मात्रा से अधिक स्टॉक या किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो कंपनी के स्वामी और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद फैक्ट्री के संचालन को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। आखिर फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी? यदि कंपनी के पास वैध लाइसेंस और दस्तावेज हैं, तो मौके पर स्टॉक और उत्पादन का पूरा लेखा-जोखा क्यों नहीं मिला? वहीं, उत्पादन चलने के बावजूद कंपनी का मैनेजर या स्वामी मौके पर क्यों मौजूद नहीं था?
फिलहाल वन विभाग की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में फैक्ट्री के संचालन और स्टॉक को लेकर क्या अनियमितताएं सामने आती हैं और जिम्मेदारी किस पर तय की जाती है।



