देवभूमि उत्तराखंड समेत पूरे देश में चैत्र नवरात्र का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में देहरादून स्थित माँ कंसमर्दनी दरबार में नवरात्र के पांचवें दिन ‘सम्पट’ खुलने के अवसर पर भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने लिया माता का आशीर्वाद
सम्पट खुलने के इस विशेष अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और माँ भगवती कंसमर्दनी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला।
क्या है माँ कंसमर्दनी का महत्व?
मंदिर के आचार्य कृष्णानंद महाराज ने बताया कि माँ कंसमर्दनी का मूल स्वरूप श्रीनगर गढ़वाल से जुड़ा है, जहां माता का प्रमुख धाम स्थित है। इसके साथ ही देहरादून के उमंग विहार, ब्राह्मणवाला में भी माता की गद्दी स्थापित है।
उन्होंने बताया कि माँ कंसमर्दनी की पूजा परंपरागत रूप से घिड़याल पंडितों द्वारा की जाती है और इसका धार्मिक महत्व बेहद विशेष माना जाता है।
भगवान कृष्ण से जुड़ी है कथा
आचार्य के अनुसार, माँ कंसमर्दनी की कथा भगवान कृष्ण से जुड़ी हुई है। जिस दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, उसी दिन योगमाया स्वरूप में माँ कंसमर्दनी का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है।
नवरात्र के पांचवें दिन क्यों खास है ‘सम्पट’?
नवरात्र के पांचवें दिन ‘सम्पट’ खुलने की परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर माता से सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है।


