ऋषिकेश। ऋषिकेश नगर निगम की बोर्ड बैठक शुरू होने से पहले उस समय जमकर हंगामा हो गया, जब बैठक स्थल पर मौजूद अव्यवस्थाओं को लेकर पार्षद भड़क उठे। नाराज पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए बैठक कक्ष से बाहर निकलकर विरोध जताया। बाद में प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं में सुधार किए जाने के बाद ही बैठक शुरू हो सकी।
बैठक शुरू होने से पहले बढ़ा विवाद
तय कार्यक्रम के अनुसार नगर निगम कार्यालय के निकट स्थित राज्य आंदोलनकारी भवन में बोर्ड बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में मेयर, नगर निगम अधिकारी और सभी पार्षद पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही पार्षद बैठक कक्ष में पहुंचे, वहां की व्यवस्था देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा।
पार्षदों का आरोप था कि बैठक में उनके बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं की गई थी। कई कुर्सियों पर धूल जमी हुई थी और फाइल रखने के लिए टेबल तक उपलब्ध नहीं थीं।
अधिकारियों की व्यवस्था देख भड़के पार्षद
पार्षदों ने आरोप लगाया कि जहां अधिकारियों के लिए आरामदायक कुर्सियां और टेबल की बेहतर व्यवस्था की गई थी, वहीं जनप्रतिनिधियों के लिए मूलभूत सुविधाओं तक का ध्यान नहीं रखा गया।
देवेंद्र प्रजापति, रामकुमार संगर और अन्य पार्षदों ने इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया और भवन से बाहर आ गए।
पार्षदों के विरोध से अधिकारियों में मची हलचल
पार्षदों के विरोध और बैठक बहिष्कार के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति बिगड़ती देख निगम प्रशासन ने तत्काल व्यवस्थाओं में सुधार करना शुरू किया। फाइल रखने के लिए टेबल की व्यवस्था की गई और बैठक कक्ष को व्यवस्थित किया गया।
काफी समझाने-बुझाने के बाद पार्षद बैठक में शामिल होने के लिए राजी हुए, जिसके बाद बोर्ड बैठक की कार्यवाही शुरू हो सकी।
बैठक के दौरान भी दिखी नाराजगी
हालांकि बैठक शुरू होने के बाद भी पार्षदों में नाराजगी साफ दिखाई दी। कई पार्षदों ने बैठक के दौरान भी निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और इसे नगर निगम की तैयारी और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल माना जा रहा है।


