रिपोर्ट: सचिन कुमार
उत्तराखंड में एलपीजी (घरेलू गैस) की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। रेखा आर्या ने कहा है कि प्रदेश में गैस की पूरी सप्लाई मौजूद है और किसी भी जिले में किल्लत जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या एजेंसी कृत्रिम अभाव पैदा करने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाएगी।
पूरे प्रदेश की सप्लाई की हुई समीक्षा
देहरादून में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री रेखा आर्या ने सभी जिलों की एलपीजी स्थिति का जायजा लिया। बैठक में विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ गैस कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जबकि जिला पूर्ति अधिकारी ऑनलाइन जुड़े।
प्रदेश में गैस कनेक्शन और स्टॉक की स्थिति
सरकार द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार:
- घरेलू एलपीजी कनेक्शन: 35,55,559
- कमर्शियल कनेक्शन: 60,976
- घरेलू सिलेंडर स्टॉक: 80,861
- कमर्शियल सिलेंडर स्टॉक: 12,146
मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में रोजाना पर्याप्त मात्रा में गैस की सप्लाई हो रही है और कहीं भी वितरण में बाधा नहीं है।
होम डिलीवरी अनिवार्य, एजेंसी से सीधे वितरण पर रोक
मंत्री ने सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए
- गैस एजेंसी या गोदाम से सीधे सिलेंडर देने पर रोक लगाई जाए
कमर्शियल कनेक्शन 24 घंटे में देने के निर्देश
व्यापारियों और संस्थानों के लिए भी राहत की बात है। मंत्री ने गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि आवेदन के 24 घंटे के भीतर कमर्शियल कनेक्शन जारी किया जाए।
साथ ही अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को केंद्र सरकार की एसओपी के अनुसार नियमित गैस सप्लाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कालाबाजारी पर सख्ती
सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है:
- 173 स्थानों पर छापेमारी
- 15 एफआईआर दर्ज
मंत्री ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
PNG कनेक्शन बढ़ाने पर जोर
मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि प्रदेश में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार से जल्द एनओसी दिलाने का अनुरोध किया जाएगा।
सप्लाई में कमी पर कंपनियों को चेतावनी
कुछ जिलों से BPCL की सप्लाई कम आने की शिकायत मिली थी। इस पर मंत्री ने कंपनी को तुरंत स्थिति सुधारने के निर्देश दिए और कहा कि यदि सुधार नहीं हुआ तो केंद्र सरकार से शिकायत की जाएगी।


