संवाददाता: अरशद हुसैन
उत्तराखंड के रुड़की से एक प्रेरणादायक और रोमांचक कहानी सामने आई है, जहां एक भारतीय कप्तान ने युद्ध जैसे हालात के बीच अपनी सूझबूझ और हिम्मत से न सिर्फ खुद को बल्कि अपने 24 साथियों को भी सुरक्षित बाहर निकाला।
65 दिन तक ‘वार जोन’ में फंसा रहा जहाज
रुड़की निवासी कैप्टन आशीष शर्मा 28 फरवरी से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अपने जहाज के साथ फंसे हुए थे। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जहां ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते हालात बेहद गंभीर बने हुए थे।
कैप्टन आशीष के मुताबिक, उस समय करीब 2,000 से 2,500 जहाज इस इलाके में फंसे हुए थे। सबसे बड़ा खतरा आसमान से था, जहां लगातार मिसाइल और ड्रोन मंडरा रहे थे। हमलों का मलबा समुद्र में गिर रहा था, जिससे हर पल खतरा बना हुआ था।
हर पल मौत का डर, लेकिन कप्तान ने नहीं टूटने दिया हौसला
65 दिनों तक जहाज पर सवार हर सदस्य के मन में डर था, लेकिन कप्तान होने के नाते आशीष शर्मा ने अपने डर को खुद तक सीमित रखा। उन्होंने पूरे साहस और संयम के साथ अपने साथियों का मनोबल बनाए रखा।
उनकी लीडरशिप और समझदारी की बदौलत जहाज पर मौजूद सभी 24 लोग सुरक्षित रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बच सके।
घर वापसी पर खुशी का माहौल
करीब दो महीने तक चले इस खतरनाक सफर के बाद जब कैप्टन आशीष शर्मा अपने घर लौटे, तो परिवार और आसपास के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 65 दिनों तक परिवार उनकी सलामती के लिए दुआ करता रहा और अब उनकी सुरक्षित वापसी पूरे इलाके के लिए गर्व का क्षण बन गई है।
रुड़की के लिए बने हीरो
कैप्टन आशीष शर्मा ने जिस तरह युद्ध जैसे हालात में अपने कर्तव्य का निर्वहन किया, वह एक मिसाल है। आज वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे रुड़की के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बन गए हैं।


