Wednesday, October 21, 2026
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श्रीनगर गढ़वाल में रात में रोके गए यात्री, होटल कारोबारियों पर लगाए आर्थिक शोषण के आरोप

रिपोर्ट: भगवान सिंह

श्रीनगर गढ़वाल: चारधाम यात्रा से लौट रहे कुछ यात्रियों ने श्रीनगर गढ़वाल में रात के समय यात्रा रोके जाने पर नाराजगी जताई है। यात्रियों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर यात्रा रोकने के साथ-साथ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को महंगी सुविधाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात्रिकालीन आवागमन को नियंत्रित किया गया था।

जानकारी के अनुसार, बीती रात चारधाम यात्रा से लौट रहे कई यात्रियों को श्रीनगर क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोक दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने यात्रियों को बताया कि पहाड़ी मार्गों पर रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है, इसलिए एहतियातन उन्हें अस्थायी रूप से रोका गया है। बाद में रात करीब 12:30 बजे यात्रियों को आगे जाने की अनुमति दे दी गई।

इस दौरान कुछ यात्रियों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। मध्यप्रदेश से आए एक यात्री ने आरोप लगाया कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। यात्री का दावा है कि पूर्व में जोशीमठ क्षेत्र में पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद उन्हें होटल में ठहरना पड़ा, जहां एक रात के लिए लगभग 30 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ा।

यात्री ने यह भी आरोप लगाया कि यात्रा मार्ग पर भोजन, पानी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए भी सामान्य दरों से कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही है। उनका कहना है कि श्रद्धालु आस्था के साथ यात्रा पर निकलते हैं, लेकिन रास्ते में उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।

यात्रियों का मानना है कि यदि सुरक्षा कारणों से यात्रा को रोका जाता है तो प्रशासन को ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक सेवाओं की कीमतों पर भी निगरानी रखनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को अनावश्यक आर्थिक परेशानी न झेलनी पड़े।

वहीं पुलिस प्रशासन का पक्ष है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए आवश्यकता पड़ने पर रात्रिकालीन यात्रा को नियंत्रित किया जाता है और यह कदम केवल सुरक्षा के मद्देनजर उठाया जाता है।

हालांकि यात्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित विभागों द्वारा मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

इस संबंध में उपजिलाधिकारी श्रीनगर का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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