Wednesday, October 21, 2026
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अब नहीं चलेगा “बाहर की दवा” का खेल: स्वास्थ्य मंत्री का सख्त एक्शन

देहरादून: राज्य के स्वास्थ्य सिस्टम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने दून मेडिकल कॉलेज के औचक निरीक्षण में कई अहम निर्देश जारी किए। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्था पर नाराज़गी जताते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि अब सरकारी अस्पतालों में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मरीजों को मिलनी चाहिए सुविधाओं का सीधा लाभ

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अस्पताल में शुरू की गई नई सुविधाओं—ऑक्यूपेशनल थेरेपी, हर फ्लोर पर रजिस्ट्रेशन काउंटर, स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक, आधुनिक पैथोलॉजी मशीनें और एनेस्थीसिया सेक्शन—का उद्घाटन किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सुविधाओं का लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचना चाहिए, न कि सिर्फ कागजों तक सीमित रहना चाहिए।

बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टरों पर सख्ती

मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवाइयां लिखना पूरी तरह गलत है।
ऐसे डॉक्टरों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाइयों का अधिकार है, उन्हें बाहर खर्च करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

निजी अस्पतालों की ओर क्यों जा रहे हैं मरीज?

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यह सवाल भी उठाया कि जब सरकारी अस्पतालों में बेहतर डॉक्टर और मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो मरीज निजी अस्पतालों का रुख क्यों कर रहे हैं।
उन्होंने माना कि सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई और मैनेजमेंट में सुधार की जरूरत है, ताकि लोगों का भरोसा मजबूत हो सके।

दून अस्पताल बनेगा मॉडल हेल्थ सेंटर

अस्पताल में पार्किंग, एक्सटेंशन और सफाई व्यवस्था को लेकर भी मंत्री ने नाराज़गी जताई।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दून अस्पताल को एक मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया जाए, जहां मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक माहौल मिले।

डॉक्टरों की रोस्टर पोस्टिंग की तैयारी

सरकार अब एक नई योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत बेहतर डॉक्टरों को रोस्टर सिस्टम के जरिए जरूरत वाले इलाकों में भेजा जाएगा।
इससे दूरदराज क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

PHC तक पहुंचेगी अल्ट्रासाउंड सुविधा

सबसे अहम फैसलों में से एक यह रहा कि अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक अल्ट्रासाउंड सुविधा पहुंचाई जाएगी।
रेडियोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर निजी संस्थानों की मदद भी ली जाएगी।

सरकार का साफ संदेश

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, अनदेखी और मरीजों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं चलेगा।
अगर इन निर्देशों को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले समय में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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