देहरादून में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी लंबित मांगों और मानदेय वृद्धि को लेकर उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां 1 अप्रैल से कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठी हुई हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेविका मिनी कर्मचारी संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि राज्यभर की करीब 98 प्रतिशत आंगनबाड़ी महिलाएं इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं, जिससे आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिल रहा है।
रेखा नेगी के अनुसार, संगठन की सबसे प्रमुख मांग मानदेय में बढ़ोतरी है। कार्यकत्रियां चाहती हैं कि राज्य सरकार की ओर से प्रतिदिन ₹140 और केंद्र सरकार की ओर से ₹150 की वृद्धि की जाए। वर्तमान में कार्यकत्रियों को ₹9300 (जिसमें ₹100 महिला कल्याण कोष में कट जाते हैं) और सहायिकाओं को मात्र ₹5250 मानदेय दिया जा रहा है, जिसे वे बेहद कम मानती हैं।
इसके अलावा, संगठन ने विभाग द्वारा की जा रही ₹300 की कटौती के बदले रिटायरमेंट या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का शासनादेश (GO) जारी करने की मांग भी उठाई है।
तीसरी महत्वपूर्ण मांग कार्य के दायरे को लेकर है। कार्यकत्रियों का कहना है कि उनसे केवल निर्धारित 6 सेवाओं का ही कार्य लिया जाए और अतिरिक्त काम के लिए उन्हें बायोमेट्रिक या ऐप आधारित सिस्टम से न जोड़ा जाए।
रेखा नेगी ने बताया कि उनकी बातचीत विभागीय अधिकारियों, सचिव, महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या और मुख्यमंत्री से भी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में कार्यकत्रियों का आंदोलन जारी रहने के संकेत मिल रहे


