रिपोर्टर: आसिफ इक़बाल
विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व एक बार फिर दुनिया के सबसे सफल टाइगर संरक्षण मॉडल के रूप में चर्चा में है। मदर डे के मौके पर यहां बाघिनों की भूमिका को लेकर खास चर्चा हो रही है, क्योंकि कॉर्बेट में बाघों की बढ़ती संख्या के पीछे सबसे बड़ा योगदान बाघिनों के मातृत्व को माना जा रहा है।
260 से अधिक बाघों का सुरक्षित आशियाना
करीब 1360 वर्ग किलोमीटर में फैले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 260 से अधिक बाघ मौजूद हैं। खास बात यह है कि इस आंकड़े में दो वर्ष से कम आयु के शावकों को शामिल नहीं किया जाता। यही कारण है कि बाघों के घनत्व के मामले में कॉर्बेट की पहचान विश्व स्तर पर अलग बनी हुई है।
बाघिनें निभा रहीं सबसे अहम भूमिका
घने जंगल, कल-कल बहती रामगंगा नदी और अपने शावकों के साथ सतर्क निगाहों में घूमती बाघिनें केवल वन्यजीवन की खूबसूरत तस्वीर नहीं हैं, बल्कि संरक्षण की सबसे बड़ी कहानी भी बयां करती हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों की नई पीढ़ी तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी बाघिनों पर होती है। शावकों को जन्म देने से लेकर उन्हें शिकार करना, खतरे से बचना और जंगल में जीवित रहने की कला सिखाने तक हर भूमिका बाघिन ही निभाती है।
‘मां की तरह देती हैं जीवन का प्रशिक्षण’
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह ने बताया कि जिस तरह इंसानी परिवार में मां अपने बच्चों को जीवन के संस्कार और जरूरी हुनर सिखाती है, उसी तरह जंगल में बाघिन अपने शावकों को हर वह कला सिखाती है जो उन्हें जंगल का राजा बनने के लिए जरूरी होती है।
संरक्षण की मिसाल बना कॉर्बेट
कॉर्बेट आज दुनिया के उन चुनिंदा टाइगर रिजर्व में शामिल है जहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विभाग और संरक्षण विशेषज्ञ मानते हैं कि मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र और बाघिनों की सफल मातृत्व क्षमता ने कॉर्बेट को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाई है.


