रिपोर्ट: सचिन कुमार
उत्तराखंड सरकार अब सीमांत गांवों के विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी में है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना के दायरे को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा है, ताकि सीमा से लगे अधिक से अधिक गांवों को विकास योजनाओं से जोड़ा जा सके।
केंद्र सरकार को भेजा गया औपचारिक प्रस्ताव
ग्रामीण विकास विभाग की अपर सचिव एवं आयुक्त अनुराधा पाल ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में चयनित सीमांत गांवों का विकास कार्य पूरा होने के बाद अन्य दूरस्थ गांवों को भी योजना में शामिल करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भारत सरकार को औपचारिक ज्ञापन और प्रस्ताव भेजकर सीमावर्ती क्षेत्रों के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सीमांत क्षेत्रों में तेजी से हो रहा विकास
सरकार का उद्देश्य सीमांत गांवों में:
- सड़क
- बिजली
- पानी
- स्वास्थ्य सेवाएं
- डिजिटल कनेक्टिविटी
- रोजगार और स्वरोजगार
जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।
MBADP के तहत भी चल रहे विकास कार्य
अनुराधा पाल ने बताया कि राज्य सरकार वर्तमान में MBADP के तहत उन क्षेत्रों में भी विकास कार्य कर रही है, जो पहले BADP योजना के दायरे में शामिल नहीं थे।
इन योजनाओं के जरिए दूरस्थ और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गांवों में आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
पलायन रोकने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमांत गांवों में बेहतर सुविधाएं और रोजगार उपलब्ध होने से पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही सीमा क्षेत्रों में आबादी बनाए रखने में भी मदद मिलेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
राज्य सरकार को केंद्र से सकारात्मक उम्मीद
राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेगी और भविष्य में उत्तराखंड के अधिक सीमांत गांवों को “वाइब्रेंट विलेज” योजना से जोड़ा जाएगा।
इससे ग्रामीण विकास के साथ-साथ पर्यटन, कृषि और स्थानीय उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।


