रिपोर्ट: सचिन कुमार
देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ ही राजधानी देहरादून समेत कई इलाकों में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। लो-प्रेशर सप्लाई और बाधित जलापूर्ति के कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए उत्तराखंड जल संस्थान ने अलर्ट मोड पर काम करना शुरू कर दिया है।
जल संस्थान के सचिव (प्रशासन) इंजीनियर सत्येंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार, गर्मियों में जल संकट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें पारंपरिक जल स्रोतों का सूखना, पानी की मांग में अचानक वृद्धि और बिजली कटौती के चलते ट्यूबवेल संचालन में बाधा शामिल हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान
विभाग ने प्रदेशभर में 369 शहरी और 691 ग्रामीण क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया है। इन इलाकों में पानी की किल्लत की आशंका अधिक जताई गई है, जिसके चलते विशेष निगरानी रखी जा रही है।
टैंकरों से राहत की कोशिश
जल संकट से निपटने के लिए 86 विभागीय टैंकरों के साथ 286 निजी टैंकरों की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में करीब 60 निजी टैंकर रोजाना प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति कर रहे हैं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
बिजली संकट से निपटने के उपाय
ट्यूबवेल संचालन पर बिजली संकट का असर कम करने के लिए 60 से अधिक स्थानों पर जनरेटर लगाए गए हैं। इससे जल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
पानी की बर्बादी पर सख्ती
जल संस्थान ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए 1 अप्रैल से 30 जून तक नए कमर्शियल और निर्माण कार्यों के लिए पानी कनेक्शन पर रोक लगा दी है। यह कदम जल संरक्षण के उद्देश्य से उठाया गया है।
शिकायत के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय
पेयजल संकट से जुड़ी शिकायतों के लिए प्रदेशभर में 31 कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं। उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1916 पर संपर्क कर अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
गर्मी के बढ़ते प्रभाव के बीच जल संस्थान की यह तैयारियां फिलहाल राहत देने की कोशिश हैं, लेकिन लंबे समय के समाधान के लिए जल स्रोतों के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।


