रिपोर्टर: सचिन कुमार
देहरादून: उत्तराखंड परिवहन विभाग ने वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र में हो रही अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। देहरादून आरटीओ प्रशासन ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें वाहन को ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) ले जाए बिना ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित वाहन की फिटनेस तत्काल निरस्त कर दी है।
आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि जांच के दौरान वाहन स्वामी ने विभाग को लिखित माफीनामा सौंपा और स्वीकार किया कि वाहन का वास्तविक परीक्षण नहीं कराया गया था। इसके बावजूद दूसरे राज्य के एक एटीएस सेंटर के माध्यम से फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करवा लिया गया। इस स्वीकारोक्ति के बाद विभाग ने दोबारा फिटनेस टेस्ट कराने का आदेश दिया है।
परिवहन विभाग अब इस पूरे मामले को अन्य राज्यों के परिवहन आयुक्तों के सामने भी उठाएगा। संबंधित एटीएस सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी ताकि इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके। विभाग का कहना है कि वाहन फिटनेस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इसी दिशा में भारत सरकार के ATS 2.0 प्रोजेक्ट को लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत जियो-टैगिंग, एएनपीआर कैमरे और रियल-टाइम फोटो-वीडियो अपलोड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा, जिससे फर्जी प्रमाणपत्र जारी करना लगभग असंभव हो जाएगा।



