विकास और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच रुड़की के लाठरदेवा शेख गांव से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी की टंकी होने के बावजूद उन्हें पीने के लिए साफ पानी तक नसीब नहीं हो रहा। हालात इतने खराब हैं कि लोग दूषित और कीड़ों वाला पानी पीने को मजबूर हैं।
करोड़ों की योजना, लेकिन गांव में नहीं पहुंचा पानी
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2016-17 में पेयजल विभाग ने करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से गांव में पानी की टंकी का निर्माण कराया था। इस योजना का उद्देश्य गांव के हर घर तक साफ पेयजल पहुंचाना था।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि टंकी बनने के बाद सिर्फ एक महीने तक ही पानी की सप्लाई हुई, इसके बाद पाइपलाइन जगह-जगह से फट गई और सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई। पिछले 8 से 10 वर्षों से गांव में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में सप्लाई सुचारू दिखाई जा रही है।
बिजली कटी, पाइपलाइन जर्जर
ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी का बिजली कनेक्शन भी काफी समय पहले काट दिया गया, जिससे यह साफ है कि टंकी लंबे समय से बंद पड़ी है।
ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक पाइपलाइन पूरी तरह जंग खा चुकी है और कई जगह से टूट चुकी है।
ग्रामीणों ने बताया कि जब कभी पानी आता भी है, तो उसमें गंदगी और छोटे कीड़े तैरते हुए दिखाई देते हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
भाजपा नेता और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
गांव के लोगों ने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनीस गौड़ और पेयजल विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग और नेताओं की मिलीभगत से योजना में भ्रष्टाचार हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी कागजों में सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है, जबकि जमीन पर हालात बिल्कुल उलट हैं।
कागजों में हुई पानी की सैंपलिंग
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों के मुताबिक फरवरी 2026 में विभाग ने कागजों में पानी की सैंपलिंग भी दिखा दी, जबकि वास्तविकता यह है कि टंकी का बिजली कनेक्शन तक कटा हुआ है और पानी की सप्लाई बंद पड़ी है।
ग्रामीणों का प्रदर्शन, सरकार से जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर गांव के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
बड़ा सवाल
अब सवाल यह उठ रहा है कि “जीरो टॉलरेंस” की बात करने वाली सरकार क्या इस मामले में सख्त कदम उठाएगी?
या फिर लाठरदेवा शेख गांव के लोग ऐसे ही दूषित पानी पीने को मजबूर रहेंगे।


