रिपोर्ट: सचिन कुमार
उत्तराखंड के गांवों को पलायन से बचाने और दोबारा आबाद करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “अपनी गणना अपना गांव” अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अभियान के मुख्य संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि यह पहल गांवों को पुनर्जीवित करने और प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है।
जोत सिंह बिष्ट ने बताया कि रोजगार, शिक्षा और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे कई गांव खाली और भुतहा होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों ने अपनी जन्मभूमि में सुरक्षा और अपनापन महसूस किया, जिसके बाद अब उनसे अपील की जा रही है कि वे अपने गांव लौटकर अपनी गणना कराएं।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य गांवों में दोबारा बसावट को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसी क्रम में हाल ही में आयोजित उत्तराखंड के ब्लॉक प्रमुखों की बैठक में 61 ब्लॉक प्रमुखों ने अभियान को सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
बिष्ट ने जानकारी दी कि अब प्रत्येक बीडीसी बैठक में ग्राम प्रधानों के माध्यम से प्रवासियों को जनगणना के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा 23 और 24 तारीख को दिल्ली में प्रवासी संस्थाओं के साथ विचार गोष्ठी आयोजित की जाएगी, जहां शहरों में रह रहे उत्तराखंड मूल के लोगों से संवाद कर अभियान को और मजबूत बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि प्रवासी अपने गांवों से दोबारा जुड़ते हैं तो इससे उत्तराखंड के खाली होते गांवों में नई ऊर्जा और विकास की संभावनाएं पैदा होंगी।


