संवाददाता: सचिन कुमार
देहरादून के किशनपुर स्थित मदरसा इमदादूल उलूम में शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मदरसे में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बिहार समेत अन्य राज्यों के बच्चे बड़ी संख्या में मिले
आयोग की टीम को निरीक्षण के दौरान मदरसे में बिहार और अन्य राज्यों से आए बच्चों की बड़ी संख्या मिली, जबकि स्थानीय बच्चों की संख्या बेहद कम पाई गई। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विभिन्न शिकायतों और एक प्रतिष्ठित एनजीओ द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के बाद की गई।
निरीक्षण के दौरान बच्चों से बातचीत भी की गई। बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता जीवित हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से यहां भेजा गया है।
बेसमेंट में चल रहा था हॉस्टल
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि मदरसे के बेसमेंट में हॉस्टल संचालित किया जा रहा था। आयोग की टीम ने पाया कि छोटे-छोटे कमरों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को रखा गया है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
अग्नि सुरक्षा और भवन मानकों में भी मिली खामियां
जांच के दौरान मदरसे में अग्नि सुरक्षा से जुड़े पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए। इसके अलावा भवन का नक्शा और अन्य आवश्यक मानकों को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं।
उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।


