ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र के हिंडोलाखाल में एक भव्य आध्यात्मिक परियोजना की शुरुआत हो गई है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा यहां दादी प्रकाशमणि रिट्रीट सेंटर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 55 फीट ऊंचा द्वादश ज्योतिर्लिंग संग्रहालय प्रमुख आकर्षण होगा।
इस परियोजना का भूमि पूजन और शिलान्यास प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री विनोद सुयाल और जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी इशिता सजवाण भी मौजूद रहीं।
कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय माहौल देखने को मिला। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन नजर आए। भोले बाबा के जयकारों से पूरा हिंडोलाखाल क्षेत्र गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा दिखा।
अपने संबोधन में मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नरेंद्रनगर के शांत, सुरम्य और पर्वतीय क्षेत्र में इस तरह का आध्यात्मिक केंद्र बनने से एक नया अध्याय शुरू होगा। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि नरेंद्रनगर पहले से ही एडवेंचर, वेलनेस और योग पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह रिट्रीट सेंटर भविष्य में वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।
उन्होंने आगे कहा कि जहां नियमित पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक गतिविधियां होती हैं, वहां लोगों का झुकाव स्वाभाविक रूप से ईश्वर और आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है। यह केंद्र लोगों में आध्यात्मिक चेतना को और मजबूत करेगा।
माउंट आबू से आई ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि से ही परमात्मा शिव ने ज्ञान और योग की धारा पूरे विश्व में प्रवाहित की है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र विश्व के लिए आध्यात्मिक प्रकाश का केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम संयोजक ब्रह्मा कुमार मेहरचंद ने बताया कि इस रिट्रीट सेंटर में चरित्र निर्माण, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, योग और ध्यान के निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए 55 फीट ऊंचा द्वादश ज्योतिर्लिंग संग्रहालय विशेष आकर्षण रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में डॉक्टर पुनीत मेहता के भजन-कीर्तन ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। वहीं महंत योगी श्रद्धा नाथ, प्रेम बहन और राधेश्याम गर्ग सहित कई वक्ताओं ने आध्यात्मिक विचार साझा किए।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उत्साह को देखते हुए आयोजकों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा गया। यह परियोजना आने वाले समय में उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान बनाएगी।


