रिपोर्टर: सचिन कुमार
देहरादून में चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘प्लास्टिक से पुण्य’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य देवभूमि उत्तराखंड को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त कर एक स्वच्छ धार्मिक पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित करना है।
अभियान की प्रमुख प्रेरक डॉ. आरूषि निशंक ने बताया कि यह पहल केवल एक पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं बल्कि एक जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छता और जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के साथ प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है।
डॉ. आरूषि निशंक ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि चारधाम यात्रा केवल दर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, संरक्षण और स्वच्छता का भी संकल्प बने।
अभियान के तहत चारधाम यात्रा मार्गों पर ‘प्लास्टिक कलेक्शन बूथ’ स्थापित किए जाएंगे। यहां श्रद्धालु प्लास्टिक जमा कर ‘पुण्य पॉइंट्स’ अर्जित कर सकेंगे। इसके साथ ही डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
एकत्रित प्लास्टिक को रिसाइकल कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. आरूषि निशंक ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को आस्था और संस्कृति से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है। उनका कहना है कि यह पहल चारधाम यात्रा को स्वच्छता के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अभियान को चारधाम यात्रा में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम माना जा रहा है।


