रिपोर्टर: धर्मेंद्र सिंह
मई दिवस के अवसर पर मसूरी में संयुक्त मई दिवस समारोह समिति के बैनर तले एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली अनुपम चौक से गांधी चौक तक निकाली गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने भाग लिया और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।
रैली के दौरान मजदूरों ने अपने अधिकारों और श्रम कानूनों में सुधार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में हुए ऐतिहासिक मजदूर आंदोलन को याद किया। उस समय मजदूरों ने “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन” की मांग को लेकर रैली निकाली थी, जिसमें पुलिस फायरिंग में सैकड़ों मजदूर शहीद हो गए थे। उन्हीं शहीदों की स्मृति में हर वर्ष मई दिवस मनाया जाता है।
मजदूर संघ के अध्यक्ष आरपी बडोनी ने केंद्र और राज्य सरकार पर श्रम कानूनों में बदलाव कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मजदूरों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो जून के पहले सप्ताह में मजदूर हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
वहीं मजदूर नेता शोभन पवार ने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और भोजन माताओं की लड़ाई मजदूर संघ पूरी मजबूती से लड़ेगा और सभी को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी पर मजदूरों को बांटने का आरोप भी लगाया।
गोल्फ कार्ट संचालन को लेकर भी मजदूर नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि यदि मजदूरों को इस व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन मजदूरों की चेतावनी ने आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होने के संकेत दे दिए हैं।


