जहरीले पानी ने उजाड़ी किसानों की मेहनत, सिसौना गांव के किसानों ने सुनाई दर्दभरी दास्तां

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रुड़की | संवाददाता: अरशद हुसैन

उत्तराखंड के रुड़की स्थित भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। सिसौना गांव के किसानों ने आरोप लगाया है कि औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जा रहे केमिकल युक्त जहरीले पानी ने उनकी फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने ब्याज पर पैसे लेकर खेती की थी, लेकिन अब उनकी मेहनत और भविष्य दोनों तबाह हो गए हैं।

रात के अंधेरे में छोड़ा जा रहा जहरीला पानी

ग्रामीणों के अनुसार, भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र की कई फैक्ट्रियां रात के समय खुले नालों में केमिकल युक्त पानी छोड़ रही हैं। यही जहरीला पानी खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे हरी-भरी फसलें कुछ ही समय में काली पड़कर नष्ट हो रही हैं। किसानों का आरोप है कि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठा है।

कर्ज लेकर की थी खेती, अब सामने रोजी-रोटी का संकट

सिसौना गांव के किसानों ने बताया कि उन्होंने साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेकर बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीदी थी। उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी फसल होने पर परिवार का पालन-पोषण बेहतर तरीके से हो सकेगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। लेकिन जहरीले पानी ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

किसानों का कहना है कि अब उनके सामने दोहरी मार है — एक तरफ फसल बर्बाद हो गई है और दूसरी तरफ कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

तहसील पहुंचे किसान, अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का भरोसा

मामला बढ़ने के बाद किसान तहसील कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से न्याय की मांग की। मीडिया के सामने संबंधित विभागीय अधिकारियों ने जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

प्रदूषण विभाग के अधिकारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और संबंधित कंपनियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि नालों में केमिकल युक्त पानी छोड़ना नियमों के खिलाफ है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बड़ा सवाल — क्या होगी ठोस कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों के खिलाफ वास्तव में कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा या फिर यह मामला भी सिर्फ जांच और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा। कैमरे में कैद खेतों की बदहाल तस्वीरें किसानों के दर्द और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी खुद बयान कर रही हैं।

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