Wednesday, October 28, 2026
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आईटीबीपी की पहल से सीमांत गांवों को मिला आर्थिक संबल, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा

रिपोर्टर : सचिन कुमार

उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की पहल एक सफल मॉडल के रूप में उभर रही है। इस पहल ने न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

ग्राम विकास विभाग की अपर सचिव अनुराधा पाल के अनुसार, इस योजना की शुरुआत स्थानीय स्तर पर पोल्ट्री और बकरी के मीट की खरीद से की गई थी। बाद में इसे विस्तार देते हुए मछली, सब्जियां और फलों को भी इसमें शामिल किया गया। इस कदम का सीधा लाभ सीमांत गांवों के किसानों और छोटे व्यापारियों को मिला है।

अब तक इस पहल के माध्यम से करीब 10 करोड़ रुपये का व्यापार स्थानीय लोगों के जरिए किया जा चुका है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और लोगों में आत्मनिर्भर बनने का उत्साह भी देखने को मिल रहा है। कई ग्रामीणों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपने छोटे-छोटे व्यवसाय भी शुरू कर दिए हैं।

इस मॉडल को और प्रभावी बनाने के लिए सशस्त्र सीमा बल (SSB) और सेना के साथ भी बातचीत जारी है, ताकि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। वहीं, दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। आईटीबीपी के डॉक्टर और पैरामेडिक्स उपलब्ध कराने पर सहमति बन गई है, जबकि राज्य सरकार दवाइयों और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करेगी।

अनुराधा पाल का कहना है कि वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस पहल को सीमांत क्षेत्रों के विकास की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम बताया।

यह मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास की संभावनाएं मौजूद हैं।

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