रिपोर्ट: अरशद हुसैन
रुद्रप्रयाग: विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में शामिल तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मंदिर की संरचना में आए झुकाव के संकेत मिलने के बाद अब इसका उपचार आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से किया जाएगा। इस संरक्षण कार्य की जिम्मेदारी केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) को सौंपी गई है।
मंदिर का विस्तृत तकनीकी अध्ययन करने के बाद विशेषज्ञों ने इसकी मौजूदा स्थिति का विश्लेषण शुरू कर दिया है। जांच के दौरान मंदिर की संरचनात्मक मजबूती को लेकर कई महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया गया, जिसके आधार पर संरक्षण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
सीबीआरआई के विशेषज्ञों का कहना है कि उपचार के दौरान मंदिर की ऐतिहासिक बनावट और धार्मिक महत्व से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के माध्यम से नींव, पत्थरों और पूरी संरचना को सुरक्षित एवं स्थिर बनाया जाएगा।
यह परियोजना केवल वर्तमान झुकाव को रोकने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि भविष्य में मंदिर को प्राकृतिक प्रभावों से सुरक्षित रखने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर पूरी की जाएगी।
करीब एक हजार वर्ष पुराना तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुख स्थान रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैज्ञानिक संरक्षण आने वाले वर्षों तक मंदिर की मजबूती और विरासत को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा।



