रिपोर्टर: नितिन अग्रवाल
कोटद्वार: उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से चर्चा और भ्रम का विषय बने लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग पर अब लगभग सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही का रास्ता साफ हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने इस मार्ग से जुड़े आदेश में प्रयुक्त “कमर्शियल वाहन” शब्द को लेकर फैली सभी आशंकाओं और भ्रम को स्पष्ट कर दिया है।
CEC द्वारा जारी स्पष्टिकरण के अनुसार, इस मार्ग पर सवारी वाहन, सरकारी बसें, गढ़वाल मोटर ओनर यूनियन (GMOU) की बसें, स्कूल बसें, किसानों के ट्रैक्टर तथा भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के संचालन को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इससे क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
यह फैसला क्षेत्र के विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से इस मार्ग पर वाहनों के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्णय से शिक्षा, कृषि, व्यापार और रोजमर्रा के आवागमन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही निर्माण कार्यों में भी तेजी आने की संभावना है, क्योंकि भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों को भी संचालन की अनुमति मिल गई है।
इस जनहितकारी निर्णय के बाद क्षेत्र की जनता ने सांसद अनिल बलूनी के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।



