रिपोर्ट: सचिन कुमार
देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 को लेकर उठे पेपर लीक विवाद का असर अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी साफ दिखाई देने लगा है। राजस्थान और उत्तराखंड से पेपर लीक के तार जुड़ने की खबरों के बाद छात्रों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है।
देहरादून को लंबे समय से ‘एजुकेशन हब’ माना जाता है, जहां उत्तराखंड समेत कई राज्यों से छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। लेकिन परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजित होने की खबरों ने छात्रों की मानसिक परेशानी बढ़ा दी है।
परीक्षा रद्द होने से छात्रों पर बढ़ा दबाव
11 और 12 मई 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी में तैयारी कर रहे छात्रों के बीच हलचल तेज हो गई।
छात्रों का कहना है कि महीनों की कड़ी मेहनत और मानसिक तनाव के बाद परीक्षा देना आसान नहीं होता, और अब उसी सिलेबस को दोबारा उसी स्तर की तैयारी के साथ पढ़ना बेहद कठिन हो गया है।
पहाड़ से आए छात्रों पर आर्थिक और मानसिक असर
देहरादून में कोचिंग कर रहे कई छात्र दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों से आते हैं। महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस, किराया और रोजमर्रा के खर्च पहले ही परिवारों पर आर्थिक बोझ डालते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की खबर ने छात्रों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
उत्तरकाशी के बड़कोट से देहरादून में NEET की तैयारी कर रहे छात्र अनुज राणा ने कहा कि उनके परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें कोचिंग के लिए भेजा था, लेकिन इस तरह की घटनाएं छात्रों का मनोबल तोड़ देती हैं।
उन्होंने कहा कि छात्र पूरे साल मेहनत करते हैं और जब परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों को होता है।
छात्रों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग की
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो। छात्रों ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जाए।


