Wednesday, October 21, 2026
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शहद उत्पादन में उत्तराखंड की बढ़ती ताकत, 10,000 से अधिक किसान जुड़े

देहरादून: गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखण्ड में मधुमक्खी पालन तेजी से किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन रहा है। राज्य में इस समय 10,000 से अधिक किसान व्यावसायिक रूप से मधुमक्खी पालन से जुड़े हुए हैं, जिनके जरिए हर साल लगभग 3,300 टन शहद का उत्पादन हो रहा है।

कृषि मंत्री के अनुसार, इसके अलावा बड़ी संख्या में किसान छोटे स्तर पर भी मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। राज्य में मुख्य रूप से इन्डिका और मेलिफेरा प्रजाति की मधुमक्खियों से शहद का उत्पादन किया जा रहा है, जो गुणवत्ता और उत्पादन दोनों के लिहाज से बेहतर मानी जाती हैं।

सरकार ने इस क्षेत्र को और बढ़ावा देने के लिए हर जिले में एक “मधुग्राम” विकसित करने की योजना बनाई है। विशेष रूप से चम्पावत और देहरादून में दो-दो मधुग्राम चिन्हित किए गए हैं। इन मधुग्रामों के जरिए किसानों को प्रशिक्षण, संसाधन और बाज़ार से जुड़ने में मदद मिलेगी।

मंत्री जोशी ने कहा कि मधुमक्खी पालन उन किसानों के लिए बेहद लाभदायक विकल्प है, जिनके पास खेती के लिए सीमित या बिल्कुल जमीन नहीं है। यह कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय है, जिससे अच्छी आमदनी संभव है।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शहद उत्पादन को और बढ़ाया जाए और अधिक से अधिक युवाओं व किसानों को इस क्षेत्र से जोड़ा जाए।

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