चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड में एक बड़ा धार्मिक और राजनीतिक मुद्दा सामने आया है। Badrinath Kedarnath Temple Committee (BKTC) की मंगलवार को आयोजित बजट बैठक में नियमावली में संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष Hemant Dwivedi ने की।
बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि समिति से जुड़े मंदिरों में गैर-सनातनी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इस फैसले की खबर सामने आते ही राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
चारधाम यात्रा से पहले हुआ फैसला
यह बैठक आगामी Char Dham Yatra की तैयारियों के बीच आयोजित की गई थी। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। ऐसे में नियमावली में बदलाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
Indian National Congress की प्रवक्ता Dr. Pratima Singh ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह फैसला सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति और सरकार का यह कदम राजनीतिक है और इससे समाज में अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है।
उनके अनुसार,
- इस तरह नियम बदलकर किसी समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।
- देश और विदेश से लाखों लोग चारधाम यात्रा में आते हैं।
- यह तय करना मुश्किल होगा कि गैर-सनातनी कौन है।
बीजेपी का जवाब
इस मुद्दे पर Bharatiya Janata Party की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के प्रवक्ता Jitendra Kunwar ने कहा कि इस फैसले का गलत अर्थ निकाला जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-सनातनी से आशय उन लोगों से है जो सनातन परंपरा में विश्वास नहीं रखते या उसका सम्मान नहीं करते।
उनका कहना है कि:
- जो लोग सनातन परंपराओं का सम्मान करते हैं, वे किसी भी वर्ग या समुदाय से हों, मंदिर में पूजा कर सकते हैं।
- यह फैसला अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ है।
मामला बना राजनीतिक बहस का विषय
मंदिरों में प्रवेश को लेकर लिया गया यह प्रस्ताव अब उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। चारधाम यात्रा से पहले इस तरह के निर्णय और उस पर हो रही बयानबाजी आने वाले समय में और राजनीतिक बहस को जन्म दे सकती है।


